बुधवार, 4 अक्तूबर 2017

चार लाइन

एक्सपायरी डेट 

दवाई की एक्सपायरी डेट होती है;
पता होती है...
इंसान की एक्सपायरी डेट होती है.
पर...लापता होती है.

गुरुवार, 28 सितंबर 2017

लघु कथा---10



माँ का दिल



नये साल की वह पहली सुबह जैसे बर्फ की चादर ओढ़े ही उठी थी. 10 बज चुके थे पर सूर्यदेव अब तक धुंध की रजाई ताने सो रहे थे. अनु ने पूजा की थाली तैयार की और ननद के कमरे में झांक कर कहा," नेहा! प्लीज नोनू सो रहा है ,उसका ध्यान रखना. मैं मंदिर जा कर आती हूँ ।"
शीत लहर के तमाचे खाते और ठिठुरते हुए उसने मंदिर वाले पथ पर पग धरे ही थे कि उसके पैरों को जैसे किसी ने जकड़ लिया. एक खौफनाक मंजर उसके मुँह बाएं खड़ा था. सामने की सड़क  पर 4-5 साल का बच्चा खून से लथपथ पड़ा था. सुबह की इस ठिठुरा देने वाली ठण्ड में सड़क विधवा की सूनी मांग की तरह खाली पड़ी थी. उसने मंदिर की ओर ये सोच के कदम बढ़ाये कि वह इस पचड़े में नहीं पड़े किन्तु उस बच्चे के करीब से निकलते हुए उसके मन में हूक सी उठी. “ न जाने किस माँ का लाल है...? कहाँ होगी वह...? क्या उसे अपने लाड़ले का ख्याल नहीं आया होगा...?” जैसे सवाल उसके मन में उठ रहे थे. वह जैसे ही थोड़ा आगे बढ़ी तो उसके पैरों को जैसे किसी ने जकड़ लिया, उसके मन में एकदम अपने बेटे नानू का ख्याल हो आया और उसने पलट कर उस बच्चे को देखा तो उससे रहा नहीं गया और वह दौड़कर उस बच्चे के पास जाकर बैठ गई, उसके हाथ में पूजा की थाली थी जिसे उसने वहीँ ज़मीन पर रख दिया और धीरे से बच्चे पर झुकी तो उसने पाया कि बच्चे की सांस चल रही थी. उसने तुरंत ही निर्णय लिया और उस बच्चे को गोद में उठाकर दौड़ लगाईं. उसे पता था कि 3 ब्लाक छोड़कर डॉ. सोनी रहते हैं, उनके घर पहुँचकर उसने तबातोड़ घंटी बजाई. डॉ. सोनी आज थोड़ा देर से सोकर उठे थे पर घंटी की आवाज से समझ नहीं पाए कि कौन हो सकता है...? दरवाजे पर वे अनु तो देखकर थोड़ा अचरज में पड़ गए. उसकी गोद में घायल  बच्चे को देखकर वो तुरंत सारा मांजरा समझ गए और जल्दी से अन्दर से कार की चाबी लेकर आये और कार सिटी हॉस्पिटल की ओर दौड़ा दी. बच्चे को ओ.टी. में ले जाकर उसका तुरंत ट्रीटमेंट शुरू कर दिया गया, और इसी दौरान पुलिस ने भी मामला दर्ज कर लिया. इतना सब होतो-होते 12 बज चुके थे. बच्चे को सुरक्षित हाथों में जान अनु ने चैन की सांस ली और अब उसे घर की याद सताने लगी. डॉ. सोनी ने उसे घर भेज दिया और उसका मोबाइल नं. ले लिया ताकि उसे बच्चे का हाल-चाल बता सकें. 2-3 बजे के करीब अनु को डॉ. का फोन आया और उन्होंने बताया कि उस बच्चे की माँ मिल गई है. जोकि अपने बच्चे के साथ बस से अगले शहर में अपने मायके जा रही थी, रास्ते में कब उसकी नींद लग गई उसे पता ही नहीं चल और वो बच्चा खिड़की खुली होने के कारण उससे बाहर झांक रहा था और इसी दौरान वह उस खिड़की से बाहर अधिक झुक गया था और सड़क पर गिर गया था जिससे उसे काफी चोटें आईं थीं पर वह अब खतरे के बाहर था. कहना नहीं होगा कि वह महिला और अनु स्नेह बंधन के ऐसे सेतु से जुड़ गए थे जो कभी भी टूटने वाला नहीं था, ये एक माँ से माँ का रिश्ता था.

रविवार, 24 सितंबर 2017

use Royale atmos to purify your home



ये मेरा घर- ये मेरा घर...

"Touch wood", दुनिया में अगर कोई भी safest place है तो वो है "मेरा घर" और जब घर की बात हो रही है तो गुलज़ार साहब की ये ghazal तो गुनगुनाने का मन भी कर आता है. " ये तेरा घर ये मेरा घर...." हाँ.... तो मै बात कर रही थी अपने घर की...!! अब आप ही बताएं कि दुनिया में कोई ऐसा इंसान होगा जो अपने घर की चाहत न करे और वो अपने लिए कोई personal space न चाहे. ठीक कहाँ न मैंने... आप भी ठीक ऐसा ही सोचते हैं न...! 
अब अपने घर के बारे में आप जब भी बात करते होंगे तो आपके चेहरे पर एक sweet smile आना लाजमी है और उसके बारे में बात करते-करते कहीं खो जाना भी आपकी एक अदा हो सकती है और आपके इसी घर पर कोई सवालिया निशान लगा दे, तो कैसा महसूस करेंगे आप...??  हम अपने इसी सपने या यूं कहें कि अपने इस आधे हक़ीकत और आधे फ़साने में बेहद खुश थे; पर.... हाय री किस्मत !!, एक दिन जब टी वी पर अपना मनपसंद सीरियल देख रहे थे तो बीच में आने वाले विज्ञापनों की अनदेखी करने की आदत के चलते हम अक्सर हम कुछ अपने घरेलू काम जैसे सब्जी काटना, बनाना या फिर खाना बनाने की तैयारी कर लिया करते थे. वो मनहूस दिन ही था जब उस दिन हम ad आने पर अपने घरेलू काम न करके विज्ञापन देखने बैठ गए और अचानक हमारी निगाह जिस विज्ञापन पर गई, तो मानो वह वहीँ की वहीँ जम कर रह गई. अरे...! जब दीपिका पादुकोण जैसी सितारा किसी टी वी ad में हो और वो भी पूरे फैशन और makeup के साथ तो फिर हमारे जैसे fashionmaina का ध्यान जाना लाजमी था. सबसे अजीब बात जो थी और उसी ने हमारा ध्यान इस ad की ओर खिंचा; और वो था दीपिका पादुकोण का अपने मुंह को mask से ढांकना... अब भला बताओ...!! कोई समझदार प्राणी भी कंही अपना मुंह इस तरह से ढांकता है भला...!!
 हम आज तक उस घड़ी को कोसते हैं जब हमने इस ad को देखने की जहमत उठाई थी. दीपिका के मुंह पर लगे मास्क ने जो हमारा ध्यान खिंचा था उसने तो मानो हमारी पूरी दुनिया ही बदल डाली थी. अब आप हमसे ये सवाल कर ही डालें कि ऐसा कैसे हो सकता है...? तो इसके जवाब में हम कहेंगे कि ऐसा हमारे साथ हो चुका है. चलिए हम अपना हाले दिल आपको सुना ही देते हैं. दीपिका के मुंह पर पड़े मास्क ने हमें उस ad को बड़े धीरज के साथ और कई बार देखने के लिए मजबूर कर दिया और हम करते भी क्या...?? हम पर तो मानों क़यामत ही टूट पड़ी थी, ये जानकर कि जिस "अपने घर" को हम दुनिया की सबसे महफूज जगह समझते थे वो कितनी बेवफ़ा निकली; वो हमारी कभी थी ही नहीं, वो तो कुछ गैरों; इनको कुछ नाम दिया गया है...हाँ..याद आया ..! indoor pollutants, की पनाहगाह बन चुका है. अब ऐसा तो नहीं था कि हम एकदम से विश्वास कर लेते, ये तो बड़ी खतरनाक बात थी और इसका conform होना अभी बाकी था.. याने picture अभी बाकी थी.
ये एक ऐसा सदमा था जिसने हमारे होशोहवास पर मानो बिजली सी गिरा दी थी; अब कुछ दिन तो लगने ही थे हमें इस सदमें से बाहर निकलने में. जब हम इस सदमें से बाहर निकले तो सबसे पहले google की शरण में जाना ठीक समझा; क्योंकि बाबा राम रहीम या आसाराम की शरण में जाने से तो बेहतर है कि बाबा google की पनाह में जाया जाये. फिर तो हम उनकी शरण में ऐसे गए कि लगा ज्ञान के सागर में गोते खाकर निकले और जो indoor pollutants के नाम के क्षुद्र प्राणियों के नाम ढूँढ कर हम लाये उसने हमारी वेदना को और भी बढ़ा दिया. लगा अभी तक हम जिसे अपना घर समझ रहे थे वो कभी भी हमारा न था. अब आप भी जान लें कि आपके घर में किन-किन लोगों का आपकी permission के बगैर बसेरा है. इन indoor pollutants के ऐसे-ऐसे नाम हैं कि हमें भी बार-बार याद करने पर याद नहीं रहते. कुछ asbestos, CO (कार्बन monoxide), biological pollutants, pressed wood products, lead जैसे नाम हैं और न जाने क्या-क्या... और इनकी मौजूदगी से होने वाली बीमारियाँ किसी slow poison ली मानिंद लग रहीं थी. इतना सब पढ़कर तो शरीर में झुरझरी सी दौड़ गई. बाप रे बाप...! हम अभी तक किस जलजले में जी रहे थे. अब तो ऐसा लग रहा था कि जल्दी से जाकर हम भी एक मास्क ले आयें. जो बात मोटे तौर पर समझ आई वो ये थी कि इन pollutants से सांस की बीमारी से लेकर cancer तक जो जाने के खतरे थे. हे भगवान्...! हम अभी तक किस अन्धकार में जी रहे थे...??? thanks to Asian Paints जिससे हम जान सके कि Royale Atmos paint का इस्तेमाल कर पराये हो चुके अपने इस घर को फिर से हम "अपना घर" बना सकते हैं. अब जिंदगी से प्यार है तो अपने घर की हवा को भी purify करना जरुरी है. मैंने तो अपने घर को Royale Atmos से paint कर दिया है... अब आपकी बारी है; अपने घर में जबरदस्ती घुसे इन घुसपैठियों को बाहर खदेड़ने की... अब ये काम कैसे करता है...? ये तो आप तभी जान पाएंगे जब आप इसे आजमाएंगे. और इसकी कार्बन टेक्नोलॉजी को आप काम करने का मौका देंगे.
 हाय....! अब तो फिर से मन जोर-जोर से गाने का कर रहा है, " ये मेरा घर- ये मेरा घर, किसी को देखना हो गर, तो मुझसे आके मांग ले मेरी नजर..मेरी नजर..."  (वीणा सेठी)
------------------------------------------------------------------------------------------------------------



मंगलवार, 25 अप्रैल 2017

बात एक अनकही सी....गीता का मनोविज्ञान



गीता का मनोविज्ञान
                   मनुष्य के जीवन का तात्पर्य समझना है तो भगवतगीता से अच्छा कोई स्त्रोत्र नहीं हो सकता. बेशक दुनिया के सारे धर्मग्रन्थ चाहे वो बाइबल, कुरान, गुरुग्रंथ साहिब हो अथवा गीता, सब एक ही बात सिखाते हैं,” जीवन में क्या नहीं करना चाहिए”. अब एक बात तो तय है कि हर व्यक्ति के पास बुद्धि और विवेक है और वो ये भी जानता है कि कुछ भी अच्छा करने या बुरा करने से क्या होता है...? “ मुझे ये चाहिए...?” अगर मन में ये बात आ जाये तो फिर मन अधीर हो उठता है, और ये चाहत उसे वो करने को मजबूर कर देती है; जिसे करने को हमारे धर्मग्रन्थ मना करते हैं. “ ये चाहिए”-हमारी पूरी चेतना इसी बिंदु पर केन्द्रित हो जाती है. अब मन ने यक़ीनन उसे पाने की तड़प के रास्ते में रूकावट आने पर क्रोद्धित तो अवश्य होना ही है. और विवेक पर से बुद्धि का नियंत्रण हटना अवश्यंभावी है. फिर पाने की इस चाहत में कुछ मिला तो नहीं अपितु स्वयं अपनी हानि अवश्य कर ली. 




        ‘कुछ चाहिए या नहीं चाहिए’ वास्तव में ‘होने या न होने’ का भ्रम मात्र ही है. इस मन:स्थिति से हम रोज दो-चार होते हैं. समस्या के मूल में यही बात है और हम ये जानते भी हैं पर मन जिद्दी बच्चे की तरह अड़े रहना चाहता है. यही कारण है कि जीवन में हमें वास्तव में क्या चाहिए...? इस बात को सोचने के बदले उन बातों में उलझ जाता है जो उसे जीवन के वास्तविक आनंद से दूर कर देती हैं. यही कारण है कि मानव जीवन जीने के भ्रम में ही अपनी तमाम उम्र गुजार देता है और वो भौतिक वस्तुओं के आस्वादन को ही जीवन का वास्तविक आनंद समझ लेता है. वास्तव में कुछ भी पाने की होड़ में व्यक्ति अपने जीवन के मूल से हट जाता है और जीवन के वास्तविक मूल्यों से परे अपने जीवन के अर्थ तलाशने लगता है. इसी मृगमरीचिका में जीवन रूपी तुरंग भटकता रहता है. जीवन के मूल को समझने की जड़ में यही मतिभ्रम वाली मन:स्थिति इंसान को जीवन के आनंद का रस नहीं लेने देती. चाहत की ये समस्या रिश्तों में भी दिखाई देती है. जबकि होना ये चाहिए की बाह्य संसार याने भौतिकता के प्रति हमारा भाव तटस्थ होना चाहिए याने सांसारिक वस्तुओं के प्रति एक प्रकार की निर्लिप्तता ही हमें जीवन के वास्तविक आनंद से परिचित करवा सकती है.


                      जीवन के प्रति यदि हम तटस्थ रहेंगे तो हम जीवन में वो सब कर सकेंगे जो वास्तव में एक मनुष्य का कर्म है. “कर्म” मानव जीवन का उद्देश्य है. वो इस पृथ्वी पर इसी लिए अवतरित हुआ है. गीता के मूल में ही कर्म योग है और ये कर्म योग तभी संभव है जब हम जीवन के प्रति तटस्थ भाव से सोचें. स्वामी विवेकानंद और शंकराचार्य ने भी जिन चार योगों की बात कही है उनमें कर्म योग सबसे श्रेष्ठ योग है और इसके लिए धार्मिक या अध्यात्मिक होने की आवश्यकता नहीं है. वास्तव में गीता कर्म आधारित जीवन की सर्वश्रेष्ट नियम पुस्तिका है. और इस पुस्तिका के प्रथम अध्याय में ही कृष्ण और अर्जुन के मध्य होने वाले संवाद में मानव मन के संघर्ष रूपी महाभारत का ही विषद वर्णन है. अर्जुन के माध्यम से मानव के “करूँ या न करूँ” या “होने या न होने”  के मानसिक संघर्ष को दर्शाया गया है. गीता सही अर्थों में मानव मन को समझने का मनोविज्ञान है.  (शेष)   
वीणा सेठी.



शुक्रवार, 7 अप्रैल 2017

युवतियों के लिए नए करिअर आप्शन



नये क्षितिज की ओर: ( युवतियों के लिए नए करिअर आप्शन)

              आजकल जब देश का युवा 12वीं करके निकलता है तो आगे क्या कोर्स करूँ ? यही चिंता सताती है और वो जिससे एक शानदार करियर का आगाज कर सके, यही सोचता है. और ये देश की लड़कियों के सामने अधिक परेशान करने वाला होता है क्योंकि उनके लिए सही करिअर चुन पाना आज भी एक समस्या है. तो आइये जाने उनके लिए कुछ करिअर आप्शन:-

1. रेडियो ज़ोकी—आजकल एफ़ एम रेडियो की धूम मची है. इसके लिए आपका एक अच्छा वक्ता होना जरुरी है. आपमें प्रेजेंटेशन स्किल याने अपनी बात को बेहतर तरीके से कहना आना चाहिए. आवाज दमदार हो और उच्चारण साफ़ हो और विषय के हिसाब से आपकी आवाज पर आपका नियंत्रण होना आवश्यक है., अच्छा हो की आप अपना खुद का बोलने का style डेवेलोप करें. बातों को मजेदार व कोमेडी से भरपूर रखने के साथ ही स्थानीय बोली भी आना चाहिए और बॉलीवुड और संगीत की जानकारी के बिना तो रेडियो ज़ोकी तो अधुरा ही मना जायेगा. आर जे बनने के लिए अपनी voice pitch पर जरुर काम करें.


2.एयर होस्टेस- हवाई सपनों और दूसरे देशों कि यात्रा और एक अच्छी सेलेरी के लिए इससे बेहतर करियर आप्शन हो ही नहीं सकता. यात्रियों उनके द्वारा बार-बार बुलाने या  किसी भी तरह के सवाल पूछे जाने पर मुस्कराकर और धैर्य से पेश आना और अपने आप को presentable रखना इस जॉब की आवश्यक शर्त है. आपका प्रेसेंस ऑफ़ माइंड और यात्रियों की जरुरत का हँसते हुए ध्यान रखना और चुनौतीपूर्ण परिस्थिति को सूझबूझ से सम्हालने का टेक्ट आपमें होना जरुरी है. ये जॉब के लिए 12 वीं के बाद अप्लाई किया जा सकता है. इंग्लिश भाषा का ज्ञान खासकर fluently बोलना आना चाहिए और इसके साथ ही कोई दो विदेशी भाषा का पूर्ण जानकार होना जरुरी है.


3. हेयर स्टाइलिस्ट:- ग्लैमर और चकचौंध की दुनिया में करिएर बनने के लिए ये आप्शन चुना जा सकता है. ये एक आर्ट है. इस करिएर को चुनने के लिए आपको बालों के प्रकारों और उसके हिसाब ने उनकी जरूरतों और उनके ट्रीटमेंट की जानकारी होना बेहद जरुरी है. और इसके लिए केमिकल्स, कास्मेटिक्स, हेयर कलर, हेयर कंडीशनर इन सबकी जानकारी और ऐसे प्रोफेशनल काम करना भी आना चाहिए. आपमें creativity का होना बेहद जरुरी है तभी आप चेहरे के लुक के हिसाब से किसी का भी हेयर style और मेकअप कर पायेंगे. इस फील्ड में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को चलने और उनके देखभाल का प्रशिक्षण लेना जरुरी है. इस काम की शुरुआत आप किसी भी हेयर सैलून में बतौर ट्रेनी से कर सकते है. 

4.दुभाषिया-अनुवादक- विदेशी भाषा का जानकार होना करिएर आप्शन के हिसाब से एक शानदार फील्ड है. अनुवादक और इंटरप्रेटर के रूप में काम करने के लिए विभिन्न विदेशी भाषाएं- स्पैनिश, जर्मन, फ्रेंच और चाइनीज की मांग बढ़ती जा रही है. मल्टीनेशनलकंपनी, टूरिज्म, फाइव स्टार होटल्स, एम्बेसी ये कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ अनुवादक या इन्टरप्रेटर की आज बेहद डिमांड है.

5.मोडलिंग- ग्लैमर से जुड़ी दुनिया में इंटर करने के लिए ये एक अच्छा आप्शन है. इसके लिए पहले किसी स्टाइलिस्ट और fashion फोटोग्राफर से अपना पोर्फोलियो बनवा लें और उसे किसी एड एजेंसी को दें जो आपके प्रोफाइल के हिसाब से आपको मोडलिंग का काम दिलवा सके. मोडलिंग में आपके लिए कई दरवाजे खुले हैं. आप टेलीविज़न मोडलिंग या फिर रैंप मोडलिंग या फिर स्टील मोडलिंग या फिर शोरूम मोडलिंग कर सकती हैं पर इस बात का ध्यान रखें की कहीं ग्लैमर की चमक मेमन आप अपना शोषण न करवा बैठें.

6.इंटीरियर डिजाइनिंग - इसके लिए आपका creative होना पहली शर्त है. घर को नया लुक देने, उसे व्यवस्थित ढंग से रखने और एक तयशुदा बजट में घर को सुंदर और सुरुचिपूर्ण लुक देने का स्किल हो उनके लिए ये एक शानदार करीअर है. इसके लिये अपने आसपास के पर्यावरण, फंगशुई व वास्तु का अच्छा ज्ञान, मनोविज्ञान की अच्छी समझ, ड्राइंग और वास्तुकला का ज्ञान होना जरुरी है क्योंकि इंटीरियर डिजाइनिंग इन सब बातों पर आधारित होती है. इसके लिए देश के संस्थाओं में इंटीरियर डिजाइनिंग का डिप्लोमा और डिग्री कोर्स उपलब्ध है.

7.स्क्रिप्ट्स राइटर- अगर आपमें लेखन की कला है तो इस फील्ड में अपना हाथ आजमा सकते हैं. बेशक ये काम कविता या कहानी लिखने से अलग है और ये एक तरह का कहानी लेखन ही है पर ये फिल्म या टी वी सिरिअल के लिए लिखी जाने वाली कहानी की तकनीकि कला है और इसका प्रबाव इसके फिल्मांकन के बाद ही सामने आता है. स्क्रिप्ट लेखन याने पटकथा लेखन का कोई अलग से कोर्स नहीं होता ये जर्नलिज्म के कोर्स के अंतर्गत आता है. इसमें कम से कम शब्दों में अपनी बात सामने तक पहुंचाने की कला होनी चाहिए ताकि किसी प्रोडक्ट की खूबियाँ सामने वाले या देखने वाले तक आपकी बात पहुंच सके.


8.आर्ट डिज़ाइनर- ये करिअर TV से लेकर फिल्म बनने तक काम आता है, इसे लिए आपका creative होना बेहद जरुरी है. अगर बड़ी मूवीज जैसे रामलीला, देवदास या फिर रामायण या अशोका जैसे TV सीरियल रहे हों सबमें एक बात कॉमन थी और वे थे उनके भव्य सेट. आर्ट या सेट designer का काम यहीं से शुरू होता है. इसके लिए एस्थेटिक सेन्स, रिसर्च स्किल, creative स्किल और फिल्म से सम्बंधित तकनिकी ज्ञान होना आवश्यक है. स्पेस का इस्तेमाल, सेट डिजाईन करना और उसका लेआउट समझना और स्टोरी को विज़ुलाइस करने की क्षमता हो तो सेट या आर्ट डिज़ाइनर सही करिएर आप्शन है.

वीणा सेठी

Ads Inside Post